अभी कुछ समय पहले मैंने एक पोस्ट पढ़ा। लेखक ने टैक्स ना भरने के न जाने कितने ही सटीक उदाहरण दिए हैं।
जैसे :
* सरकार हमारे टेक्स का सारा पैसा घोटाला करके कुछ लोगों के ख़जाने भरने का काम करती है।
* सरकार जब हमें बढ़ियां रोड, होस्पिटल, स्कूल, इत्यादि नहीं दे सकती तो इसे टैक्स लेने का कोई अधिकार नहीं है।
* चूँकि सरकार 24 घंटे बिजली नहीं दे पाती है और हमें इन्वर्टर खरदना पड़ता है इसलिए टैक्स की थोड़ी सी चोरी तो हमारा हक़ है।
* हमें अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना पड़ता है, तो हम टैक्स क्यों दें। इसके लिए तो हमें सरकार से पैसे मिलने चाहिये।
अब तक तो आपको यकीन हो गया होगा की टैक्स चोरी करना सही ही नहीं बल्कि हमारा हक़ है । अभी तक अगर आपने टैक्स भरा है तो कितनी बड़ी गलती की है।
अब जरा सोचिये की सरकार ये सब चीजें क्यों नहीं करती।
* क्या सरकार के पास इतना पैसा नहीं है।
* क्या हर इंफ्रा स्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का टेंडर किसी नेता को घूस खिला कर कोई कांट्रेक्टर हासिल कर लेता है। उसके बाद घूस खिला कर कोई इंजिनियर से पास करा लेता है।
दोनों ही बातें सही है।
अब थोड़ा यूनियन बजट को देखते हैं। http://indiabudget.nic.in/glance.asp
अगर सरकार की कलेक्शन को 100 रुपया माने।
यह कैसे जमा होता है।
21 रूपये लोन से , 89 रुपये टैक्स से। इसमें सर्फ 14 रूपये इनकम टैक्स से जमा होता है।
यह खर्च कैसे होता है।
19 रूपये व्याज में, 10 रूपये सब्सिडी में, 10 रूपये डिफेन्स में। 61 रूपये बांकी ख़र्च के लिए जिसमें सरकारी कर्मचारी की तनख्वा भी शामिल है।
आप देखेंगे कि हम अभी एक बड़ा सा हिस्सा लोन लेते हैं और क़रीब उतना ही व्याज पे ख़र्च करना पड़ता है।
अब देखें की कितने लोग इनकम टैक्स देते हैं। सरकारी डाटा के हिसाब से सिर्फ 1% लोग टैक्स भरते हैं । हालाँकि 3-4% रिटर्न फाइल करते हैं।
इससे यह साबित हो जाता है कि देश को पैसे की बेहद कमीं है।
अब हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए की सरकार अपना काम ठीक से क्यों नहीं कर पाती है।
सरकार का कोई मंत्री, MLA, MP, कोई योजना पास करवाता है। हम में से ही कोई कॉन्ट्रेक्टर / व्यापारी घूस देकर कॉन्ट्रैक्ट अपने नाम करवा लेता है। अगर आप उससे पूछेंगे की वह ऐसा क्यों करता है, तो उसका जवाब होगा की सही तरीके से वह सारी जरूरतें नहीं पूरी कर सकता और चूँकि सरकार विफल है ( लेख के शुरुआत के कुछ पॉइंट्स ) इसलिए ये उसकी मजबूरी है।
अब वो घटिया काम महँगे दाम पर करता है । और एक सरकारी अफ़सर से घूस देकर पास करा लेता है। अगर आप उस अफसर से पुछेंगे की वो ऐसा क्यों करता है तो उसका जवाब भी कुछ ऐसा ही होगा।
इसी तरह का जवाब आपको किसी थोक विक्रेता से भी मिलेगा जो टैक्स चोरी अपना अधिकार समझते है।
इसी तरह बहुत लोग टैक्स चोरी और घूस को गलत नहीं, बल्कि उनका अधिकार समझते हैं। यह नहीं समझते की उनकी वजह से देश और सरकार सही काम नहीं कर पा रही। सभी दूसरों की ज्यादा गलती दिखा कर अपनी छोटी गलती को सही बता देतें हैं।
ये सरकारी अफसर, ये व्यापारी, टैक्स चोरी करने वाले प्रोफेशनल हम में से ही एक है और सबके पास टैक्स चोरी करने का कारण दूसरों की ग़लती है।
देश की करीब 80-90% जनता को टैक्स देने की जरुरत नहीं है, क्योंकि उनकी आमदनी कम है। अगर बांकी 10-20% जनता जो दूसरों की गलती दिखा कर अपनी टैक्स चोरी को सही बताते हैं, टैक्स देने लग जाये, और घूस लेना बंद करदें तो सारी प्रॉब्लम दूर हो जाएगी।
सारा टैक्स सही जगह पर खर्च होगा। शायद देश को लोन न लेना पड़े और हम व्याज के अलावा मुलधन भी चूका पायें।
अगर एक आदमी जो टैक्स देने के लायक है और टैक्स नहीं देता है, तो उसके बदले या तो टैक्स देने वाले व्यक्ति को ज्यादा टैक्स देना पड़ता है या सरकार को लोन ज्यादा लेना पड़ता है।
अब आप खुद समझदार हैं। अगर सब लोग अपनी टैक्स चोरी और घूसख़ोरी को बंद कर दें तो सरकार अपने आप सही काम करेगी। और हमारी सारी ख़्वाइसे पूरी हो जायेगी।
सरकार हम से ही बना है, और इसे हम मिलजुल कर चला रहे हैं।
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